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Ling ( लिंग ) परिभाषा , भेद , लिंग के प्रकार

Ling ( लिंग ) परिभाषा :-‘लिंग’ शब्द अंग्रेजी के ‘Gender’ शब्द के लिए प्रयुक्त होता है। लिंग शब्द का अर्थ है चिन्ह या पहचान का साधन। ‘शब्द के जिस रूप से यह पता चले कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे व्याकरण में लिंग कहते हैं।’

  • हिंदी में दो लिंग हैं- पुंलिंग और स्त्रीलिंग। प्रत्येक संज्ञा शब्द या तो पुंलिंगवाची होगा अथवा स्त्रीलिंगवाची, क्योंकि बिना लिंग से जुड़े
    वह वाक्य में प्रयुक्त नहीं हो सकता। वाक्य में क्रिया का रूप संज्ञा के लिंग (Ling) (तथा वचन) के अनुसार बदलता है, जैसे- ‘घोड़ा दौड़ता है।
    घोड़ी दौड़ती है।‘ साथ ही अनेक विशेषण शब्द भी संज्ञा के लिंग के अनुसार परिवर्तित होते हैं, जैसे- ‘काला घोड़ा /काली घोड़ी’।
  • उभयलिंगी शब्द- कुछ शब्द ऐसे भी होते हैं जिनका प्रयोग दोनों लिंगों (पुंलिंग तथा स्त्रीलिंग) में हो सकता है। इन शब्दों में लिंग
    परिवर्तन नहीं होता, जैसे- प्रधानमंत्री, मंत्री, इंजीनियर, डॉक्टर, मैनेजर आदि। उदाहरण-
  1. प्रधानमंत्री पधार रहें हैं।
  2. डाक्टर पर चली गई हैं।
  3. लंका की प्रधानमंत्री कल विदेश जा रही हैं।
  4. डाक्टर बुला रहें हैं।
Ling ( लिंग ) परिभाषा , भेद , लिंग के प्रकार

Ling ( लिंग ) परिभाषा , भेद , लिंग के प्रकार

लिंग के प्रकार (Ling kitne Prakar ke Hote Hain)

 हिन्दी में दो लिंग होते हैं –

1.पुल्लिंग

2.स्त्रीलिंग

संस्कृत में तीन लिंग होते हैं-

1.पुल्लिंग

2.स्त्रीलिंग

3.नपुंसक लिंग।

पुल्लिग की पहचान

1. आव, पा, पन, न– ये प्रत्ययं जिन शब्दों के अंत में हों, वे || प्राथः पुल्लिंग होते हैं।

जैसे मोटा, चढ़ाव, बुढ़ापा, लड़कपन, लेन-देन

2-पर्वत, मास, वार, और कुछ ग्रहों, के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे-विन्ध्याचल, हिमालय, वैशाख, सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध आदि।

३. पेड़ों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे-पीपल, नीम, आम, शीशम, सागौन, जामुन, आदि।

4.अनाजों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे- बाजरा, गेहूं, चावल, चना, मटर, जो, उड़द, आदि।

5.द्रव पदार्थों के नाम पुल्लिग होते हैं।

जैसे- पानी, सोना, ताँबा, धी , तेल आदि

6. रत्नों के नाम पुल्लिग होते हैं।

जैसे- हीरा, पन्ना, मूंगा, मोती माणिक आदि

7. देह के अवयवों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे– मस्तक, दाँत,हाथ, कान, गला, तालु, रोम आदि।

8. जल, स्थल और भूमण्डल के भागों के नाम पुल्लिंग होते हैं।

जैसे- समुद्र, भारत, देश, नगर, द्वीप, आकाश, पाताल, घर, सरोवर आदि

9. वर्णमाला के अनेक अक्षरों के नाम पुल्लिग होते हैं।

जैसे- अ, उ, ए, ओ, क, ख, ग, ध, च, छ, य, र, ल, व , श आदि।
नित्य पुल्लिंग शब्द- तोता, मच्छर, कौवा, विच्छू आदि।

स्त्रीलिंग की पहचान

  1. जिन संज्ञा शब्दों के अंत में ‘ख’ होता है, तो स्त्रीलिंग कहलाते हैं। जैसे- ईख, भूख, चोख, राख आदि।
  2. जिन भाववाचक संज्ञाओं के अंत में ट, वट या हट होता है, वे स्त्रीलिंग कहलाती हैं।
    जैसे- झंझट, आहट, चिकनाहट, बनावट, सजावट आदि।
  3. अनुस्वारांत, ईकारांत, ऊकारांत, तकारांत, सकारांत, संज्ञाएं स्त्रीलिंग कहलाती हैं।
    जैसे- रोटी, टोपी, नदी, चिट्ठी, उदासी रात, बात, छत, भीत, लू, साँस आदि।
  4. भाषा, बोली और लिपियाँ के नाम स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- हिन्दी, संस्कृत देवनागरी, पहाड़ी, तेलुगु, पंजाबी।
  5. जिन शब्दों के अंत में ‘इया‘ आता है, वे स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- कुटिया, खटिया, लुटिया, चिड़िया आदि।
  6. नदियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- यमुना, गंगा, गोदावरी, ताप्ती आदि।
  7. तिथियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे- पहली, दूसरी, प्रतिपदा, पूर्णिमा आदि।
  8. पृथ्वी ग्रह स्त्रीलिंग है।
  9. नक्षत्रों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं। जैसे-अश्विनी, रोहिणी, भरणी आदि।
  • नित्य स्त्रीलिंग शब्द– कोयल, मैना, चील आदि।
  • शब्दों का लिंग परिवर्तन -पुंल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने के लिए जोचिन्ह लगाये जाते हैं, वे स्त्री प्रत्यय कहलाते हैं। इनमें से कुछ
    प्रमुख प्रत्यय इस प्रकार हैं-
    ई, इया, इन, नी, आनी, आइन, आ, इका, इनी (इणी) आदि।

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