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National Security Act | What is National Security Act | रासुका क्या होता है?

National Security Act What is National Security Act रासुका क्या होता है
Written by FreeNotes

National Security Act:-आज हम आपके लिए एक नयी जानकारी लेकर आयें है जो कि National Security Act यानी रासुका से सम्बन्धित है दोस्तों जैसा की इस समय Corona Virus India में बहुत ही गम्भीर रूप से अपना असर दिखा रहा है इस महामारी यानी Corona Virus को रोकने के लिए देश में Lock Down की स्थित है। इन सभी के बीच Doctors, Nurse, Police, सफाई कर्मचारी इत्यादि के ऊपर हमले होने की घटनाओं और इनको परेशान करने की घटनाओं में बीच उत्तर प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश सरकार ने इस कानून के तहत कुछ लोगों पर मामला दर्ज किया है।

आइये अब इस लेख में जानते हैं कि आखिर यह राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), या रासुका क्या होता है, कब लगाया जाता है और इसके तहत किस तरह की सजा के प्रावधान हैं? तो रासुका से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी के लिए आप इस लेख को पूरा ध्यान पूर्वक पढें।

अगर, केंद्र या राज्य सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उसके सामने बाधा उत्पन्न कर रहा है या आवश्यक सेवा की आपूर्ति में बाधक बन रहा है, तो सम्बंधित सरकार द्वारा उस व्यक्ति को गिरफ्तार कराया जा सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 23 सितंबर 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान अस्तित्व में आया था। रासुका में संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है।

National Security Act  What is National Security Act  रासुका क्या होता है

National Security Act What is National Security Act रासुका क्या होता है

 Provisions of National Security Act (रासुका के प्रावधान)

  1. यह अधिनियम, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को किसी व्यक्ति को भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने, विदेश के साथ भारत के संबंधों को चोट पहुँचाने, सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव या आपूर्ति को बाधित करने, Duty पर तैनात किसी पुलिस कर्मी पर हमला करने के जुर्म में गिरफ्तार करने की ताकत देता है। अभी हाल में मध्य प्रदेश में इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं।
  2. National Security Act के तहत, सम्बंधित अधिकारी को यह Power है कि वह संदिग्ध व्यक्ति को बिना कारण बताये 5 दिनों पर कैद में रख रख सकता है जबकि विशेष परिस्थितियों में यह अवधि 10 दिन तक हो सकती है। इसके बाद उसे राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है।
  3. NSA के तहत, गिरफ्तार व्यक्ति सरकार द्वारा गठित किसी सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन उसे मुक़दमे के दौरान वकील की सहायता प्राप्त करने का हक़ नहीं है।
  4. यह कानून, सरकार को किसी विदेशी को उसकी गतिविधि को नियंत्रित करने के लिए गिरफ्तार करने या देश से बाहर निकालने की शक्ति भी देता है।
  5. अभी हाल ही में गाज़ियाबाद और दिल्ली में Corona Virus के मरीजों का इलाज कर रहे Doctors से बदतमीजी करने और संक्रमित मरीजों द्वारा अपने Corona संक्रमण को अन्य स्वस्थ लोगों तक पहुँचाने के जुर्म में कुछ लोगों पर रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया है
  6. राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Act) में यह प्रावधान है कि सरकार, किसी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रख सकती है। लेकिन सरकार द्वारा नए सबूत मिलने पर इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है।
  7. अगर कोई अधिकारी किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करता है तो उसे राज्य सरकार को इस गिरफ़्तारी का कारण बताना पड़ता है। जब तक राज्य सरकार इस गिरफ्तारी का अनुमोदन नहीं कर देती है तब तक गिरफ़्तारी की अधिकतम अवधि बारह दिन से ज्यादा नहीं हो सकती है।
  8. ध्यान रहे कि गिरफ़्तारी के आदेश, जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त अपने संबंधित क्षेत्राधिकार के तहत जारी कर सकते हैं।
  9. भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को भी ‘रासुका’ के तहत गिरफ्तार करके एक साल तक जेल में रखा गया था लेकिन बाद में छोड़ दिया गया था।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), NSA के तहत मामलों को अपने डेटा में शामिल नहीं करता है क्योंकि इस कानून के तहत बहुत कम संख्या में FIR दर्ज की जाती है। इसलिए, NSA के तहत गिरफ्तार किये गये लोगों की संख्या के बारे में सटीक जानकारी नहीं है। चूंकि इस कानून में भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी कारण बताये गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ समय तक अपना वकील रखने की भी अनुमति नही होती है, इसलिए इस क़ानून की तुलना अंग्रेजों के Raulet Act  से भी की जाती है। कई जानकारों के अनुसार, राज्य सरकार ने NSA को ‘Extra Judicial Power’ के तौर पर इस्तेमाल भी किया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA):

  • राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) का उपयोग केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा निवारक निरोध उपायों के रूप में किया जाता है।
  • NSA किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा उत्पन्न करने से रोकने हेतु केंद्र या राज्य सरकार को व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार देता है।
  • सरकार किसी व्यक्ति को आवश्यक आपूर्ति एवं सेवाओं के रखरखाव तथा सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने से रोकने के लिये NSA के अंतर्गत कार्यवाही कर सकती है।
  • किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने हिरासत में रखा जा सकता है। लेकिन सरकार को मामले से संबंधित नवीन सबूत मिलने पर इस समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है।

निवारक निरोध (Preventive Detention)

  • भविष्य के अपराध करने या अभियोजन से बचने के लिये किसी व्यक्ति की हिरासत में लिया जाना निवारक में शामिल है। यह ‘गिरफ्तारी’ (Arrest) से अलग होता है। गिरफ्तारी तब की जाती है जब किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगाया जाता है।

NSA की पृष्टभूमि:

  • भारत में निवारक निरोध कानून की शुरुआत औपनिवेशिक युग के बंगाल विनियमन- III, 1818 (Bengal Regulation- III, 1818) से मानी जाती है। इस कानून के माध्यम से सरकार, किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रियाओं से गुज़रे बिना सीधे ही गिरफ्तार कर सकती थी।
  • एक सदी बाद ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट, 1919 (Rowlatt Acts-1919) को लागू किया, जिसके तहत बिना किसी परीक्षण (Trial) के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने की अनुमति दी गई।
  • स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1950 में निवारक निरोधक अधिनियम (Preventive Detention Act- PDA) बनाया गया, जो 31 दिसंबर, 1969 तक लागू रहा।
  • वर्ष 1971 में आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (Maintenance of Internal Security Act-  MISA) लाया गया जिसे वर्ष 1977 में जनता पार्टी सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया। बाद में कॉंग्रेस सरकार द्वारा पुन: NSA लाया गया।

NSA के साथ विवाद:

  • मूल अधिकारों से टकराव:
    • सामान्यत: जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे कुछ मूल अधिकारों की गारंटी दी जाती है। इनमें गिरफ्तारी के कारण को जानने का अधिकार शामिल है। संविधान के अनुच्छेद 22 (1) में कहा गया है कि एक गिरफ्तार व्यक्ति को परामर्श देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता से टकराव:
    • आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code- Cr.PC) की धारा 50 के अनुसार गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार तथा जमानत के अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिये। इसके अलावा Cr.PC की धारा 56 तथा  76 के अनुसार गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर एक व्यक्ति को अदालत में पेश किया जाना चाहिये। इनमें से कोई भी अधिकार NSA के तहत हिरासत में लिये गए व्यक्ति को उपलब्ध नहीं है।
  • आँकड़ों की अनुपलब्धता:
    • ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ (National Crime Records Bureau- NCRB); जो देश में अपराध संबंधी आँकड़े एकत्रित तथा उनका विश्लेषण करता है, NSA के तहत आने वाले मामलों को अपने आँकड़ों में शामिल नहीं करता है क्योंकि इन मामलों में कोई FIR दर्ज नहीं की जाती है। अत: NSA के तहत किये गए निवारक निरोधों की सटीक संख्या के आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

आगे की राह:

  • वर्तमान समय कानून पर पुनर्विचार करने का है, क्योंकि अपने अस्तित्व के चार दशकों में NSA हमेशा राजनीतिक दुरुपयोग के कारण चर्चा में रहता है।
  • मूल अधिकारों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के मध्य संतुलित तथा पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाए जाने; जिसमें NCRB को NSA के तहत आने वाले मामलों को अपने आँकड़ों में शामिल करना भी शामिल हो, की आवश्यकता है।

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